Friday, November 30, 2018

हॉकी वर्ल्ड कप: भारत का जोरदार आगाज, साउथ अफ्रीका को 5-0 से रौंदा

भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप में जोरदार शुरुआत की है. बुधवार को उसने अपने पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका को 5-0 से रौंद डाला. वर्ल्ड रैंकिंग में पांचवें नंबर पर काबिज भारत की ओर से मनदीप सिंह (10वें मिनट में), आकाशदीप (12वें मिनट में),  सिमरनजीत (43 और 46वें मिनट में) और ललित उपाध्याय (45वें मिनट में) ने गोल दागे.

कलिंगा स्टेडियम में खेले गए इस मैच में 15वीं रैंकिंग वाली 'कमजोर' दक्षिण अफ्रीकी टीम गोल का खाता भी नहीं खोल पाई. अब पूल-सी में दो दिसंबर को भारत का मुकाबला बेल्जियम से होगा.

भारतीय टीम विश्व कप का खिताब जीतकर 43 साल का सूखा समाप्त करने के अभियान पर है. हालांकि टीम के लिए अपने इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा. भारत की खिताबी राह में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, नीदरलैंड्स, जर्मनी और पाकिस्तान जैसी टीमें परेशानी बनकर खड़ी हो सकती हैं.

मैच रिपोर्ट-

भारतीय हॉकी टीम ने खचाखच भरे स्टेडियम में दर्शकों को तनिक भी निराश नहीं किया. अब तक एकमात्र 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम को इस बार खिताब के प्रबल दावेदारों में माना जा रहा है. कोच हरेंद्र सिंह की टीम ने अपेक्षा के अनुरूप शुरुआत करते हुए दक्षिण अफ्रीका को पूरे 60 मिनट मैच में वापसी का मौका ही नहीं दिया.

कोच हरेंद्र सिंह ने टूर्नामेंट से पहले ही कहा था कि उनके खिलाड़ी आक्रामक खेल दिखाएंगे और मनप्रीत सिंह एंड कंपनी ने वही किया. भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर सातवें मिनट में मिला, जिस पर हरमनप्रीत सिंह का निशाना चूकने के बाद मनदीप ने रिबाउंड पर गोल दागा.

पहले क्वार्टर में ही भारत ने अपनी बढ़त दुगुनी कर ली जब 12वें मिनट में आकाशदीप ने बेहतरीन फील्ड गोल किया. दूसरे क्वार्टर में भी दक्षिण अफ्रीकी टीम भारत के डिफेंस को भेदने में नाकाम रही. भारत को 19वें मिनट में मिला पेनल्टी कॉर्नर बेकार गया, जबकि 27वें मिनट में टीम ने एक और सुनहरा मौका गंवा दिया.

ब्रेक के बाद भारत को 34वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह फिर गोल नहीं कर सके. तीसरे क्वार्टर के आखिरी दो मिनट में भारत ने दो गोल करके अपनी बढ़त और मजबूत कर ली. सिमरनजीत ने 43वें मिनट में और इसके दो मिनट बाद ललित ने गोल किया .

मनदीप अकेले गेंद लेकर दाहिने फ्लैंक से दौड़े और सिमरनजीत को सर्कल के भीतर उम्दा क्रॉस दिया, जिसने गेंद को गोल के भीतर डिफ्लैक्ट करने में कोई चूक नहीं की. इसके दो मिनट बाद आकाशदीप के मूव पर ललित ने गोल करके भारत को 4-0 की बढ़त दिला दी.

आखिरी क्वार्टर में भारत को पहले ही मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला. इस पर सिमरनजीत ने दक्षिण अफ्रीकी गोलकीपर रासी पीटर्स को छकाकर रिबाउंड पर गोल दागा. दक्षिण अफ्रीका को मैच का एकमात्र पेनल्टी कार्नर 42वें मिनट में मिला, जिस पर गोल नहीं हो सका.

बेल्जियम ने उद्घाटन मैच में कनाडा को हराया

ओलंपिक रजत पदक विजेता बेल्जियम ने हॉकी विश्व कप के उद्घाटन मैच में बुधवार को कनाडा को 2-1 से हरा दिया. दुनिया की तीसरे नंबर की टीम बेल्जियम का इस बेमेल मुकाबले में 11वीं रैंकिंग वाली कनाडा को हराना तय ही माना जा रहा था, लेकिन टीम ने अपने प्रदर्शन से प्रभावित नहीं किया.

अब बेल्जियम टीम दो दिसंबर को भारत से खेलेगी, जबकि कनाडा का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा. पहले दो क्वार्टर में बेल्जियम ने काफी तेज रफ्तार हॉकी खेली, लेकिन बाद में लय कायम नहीं रख सकी.

Thursday, November 15, 2018

नर्मदा का सियासी सफर: कांग्रेसी ही ‘जयस’ के ‘पंजे’ को हराने में लगे

मनावर विधानसभा क्षेत्र की जब तक यात्रा नहीं कर ली जाए और डॉ. हीरालाल अलावा के अलावा मतदाताओं के साथ-साथ नाराज कांग्रेसी नेताओं के अंदर उबल रहे गुस्से से रूबरू न हो लिया जाए, सुर्खियों में बने हुए आदिवासी संगठन ‘जयस’ (जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन) के सामने अपने राजनीतिक अस्तित्व को लेकर खड़े हुए संकट का ठीक से पता नहीं चल सकता।

डॉ. अलावा को इस समय जो लड़ाई उन्हें पंजे के निशान पर चुनाव लड़ाने वाली कांग्रेस के नेताओं से ही लड़नी पड़ रही है और उसके नतीजे ‘जयस’ के साथ-साथ समूचे धार जिले की कांग्रेसी राजनीति को प्रभावित करने वाले हैं। डॉ. अलावा को भाजपा की रंजना बघेल के साथ ही अपनी पार्टी के कुछ लोगों से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

पहले से ही दो फाड़ हो चुके ‘जयस’ के नेता डॉ. अलावा ने पहले दावा किया था कि वे निमाड़ सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में पचास-साठ उम्मीदवार खड़े करेंगे। तब ऐसा माना गया था कि ‘जयस’ का आदिवासी क्षेत्रों में एक तीसरी शक्ति के रूप में उदय हो रहा है जो भाजपा और कांग्रेस दोनों को प्रभावित करने वाला है।

पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अकेले डॉ. अलावा को कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने अपने चुनाव चिन्ह पंजे पर लड़ने के लिए तोड़ लिया। ‘जयस’ नेता मान भी गए और बाकी सीटों की मांग छोड़ दी। पर अलावा ने कांग्रेस से मांग जरूर की थी कि वे कुक्षी से ही लड़ना चाहते हैं क्योंकि वह स्थान उनके संगठन की गतिविधियों का केंद्र है। मनावर में स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। दिग्विजय सिंह कुक्षी के मौजूदा विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल को छेड़ना नहीं चाहते थे।

उन्होंने अलावा को मनावर से कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़ने के लिए तैयार कर लिया। उनका साथ दिया तीन बार के कांग्रेसी सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी ने, जो 2008 में रंजना बघेल से हार चुके थे। इधर कुक्षी में पिछली बार केवल 1639 मतों से हारे निरंजन डावर पांच साल से क्षेत्र में काम में लगे हुए थे। डावर कहते हैं कि जब उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल हो रही थी, तब उनका ही नाम सबसे ऊपर था। वे तैयारी में भी जुटे थे और लाखों रुपए खर्च भी कर चुके थे। सारे कांग्रेसी कार्यकर्ता भी उनके नाम को लेकर उत्साहित थे।

इस बार तो रंजना बघेल को हराने में भाजपा के लोग भी उनका साथ देने वाले थे पर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और दीपक बावरिया ने चुपचाप तरीके से अलावा को ‘पंजा’ थमा दिया। अब अलावा के साथ प्रचार में राजूखेड़ी के अलावा कांग्रेस का कोई बड़ा स्थानीय नेता काम नहीं कर रहा है। दिग्विजय जब मनावर आए थे, तब उनका इस बात को लेकर काफी विरोध किया गया, काले झंडे भी दिखाए गए। निरंजन डावर ने भी निर्दलीय के तौर पर बाद में अपना नामांकन भर दिया, जिसे उन्होंने भारी दबाव के चलते बुधवार को वापस ले लिया।

मनावर में इस समय भाजपा के साथ-साथ कांग्रेसी भी डॉ. अलावा को हराने में जुटे हैं। उनका कहना है कि ‘जयस’ अगर जीत गई तो मनावर की सीट हमेशा के लिए कांग्रेस से छिन जाएगी। कांग्रेस नेता मानते हैं कि अलावा जीत गए तो क्षेत्र में नक्सलवाद हावी हो जाएगा। मेधा पाटकर और हार्दिक पटेल जैसे नेताओं का गढ़ बन जाएगा।

लोगों को डराना-धमकाना शुरू हो जाएगा। पाटकर और पटेल दोनों ही अलावा का समर्थन भी कर रहे हैं। डावर ने चाहे नाम वापस ले लिया हो, राजूखेड़ी और अलावा के खिलाफ आक्रोश के चलते अधिकांश कांग्रेसी कार्यकर्ता अब घर बैठ जाएंगे या क्षेत्र छोड़ देंगे।

अलावा कहते हैं कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। वे आदिवासियों के हितों के लिए काम कर रहे हैं पर निहित स्वार्थ वाले लोग उन्हें रोकना चाहते हैं। वे ऐसा होने नहीं देंगे। क्षेत्र के सारे आदिवासी और गरीब तबके के लोग उनके साथ हैं। यहां स्थित सीमेंट प्लांट ने भाजपा के नेताओं की मदद से बत्तीस गांवों की जमीन को खरीद लिया है और आदिवासी रहवासियों को अपनी जगहों से हटाया जा रहा है।

मनावर के साथ लगे गांवों में घूमने से पता चलता है कि हालात कितने खराब हैं। खदानों से चूना पत्थर कन्वेयर बेल्ट के जरिए गांवों के ऊपर के आसमान को चीरते हुए प्लांट तक पहुंचता है। अलावा कहते हैं कि इलाके में केवल गांव की जमीन ही नहीं सबकुछ खरीद लिया गया है, जिसमें उनका विरोध कर रहे निहित स्वार्थों का ईमान भी शामिल है।

डॉ. अलावा को जिताने में हाल-फिलहाल उनके संगठन के युवा कार्यकर्ता और राजूखेड़ी के साथ जुड़े कुछ कांग्रेसी ही जुटे हैं। कांग्रेस का कोई बड़ा नेता दिल्ली या भोपाल से स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते अलावा के पक्ष में मनावर पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

डॉ. अलावा को हराने में चारों तरफ की ताकतें लगी हुई हैं। अलावा को पता है कि उनकी जीत ‘जयस’ को जिंदा रखने के लिए कितनी जरूरी है और हार के परिणाम क्या होंगे। मनावर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव तय करने वाला है कि आदिवासी क्षेत्रों में डॉ. अलावा और ‘जयस’ को इलाके में राजनीतिक रूप से जिंदा रहने दिया जाए या बेदखल कर दिया जाए। मनावर में मुकाबला कांग्रेस भाजपा और ‘जयस’ तीनों के लिए दिलचस्प होने वाला है।