Thursday, November 15, 2018

नर्मदा का सियासी सफर: कांग्रेसी ही ‘जयस’ के ‘पंजे’ को हराने में लगे

मनावर विधानसभा क्षेत्र की जब तक यात्रा नहीं कर ली जाए और डॉ. हीरालाल अलावा के अलावा मतदाताओं के साथ-साथ नाराज कांग्रेसी नेताओं के अंदर उबल रहे गुस्से से रूबरू न हो लिया जाए, सुर्खियों में बने हुए आदिवासी संगठन ‘जयस’ (जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन) के सामने अपने राजनीतिक अस्तित्व को लेकर खड़े हुए संकट का ठीक से पता नहीं चल सकता।

डॉ. अलावा को इस समय जो लड़ाई उन्हें पंजे के निशान पर चुनाव लड़ाने वाली कांग्रेस के नेताओं से ही लड़नी पड़ रही है और उसके नतीजे ‘जयस’ के साथ-साथ समूचे धार जिले की कांग्रेसी राजनीति को प्रभावित करने वाले हैं। डॉ. अलावा को भाजपा की रंजना बघेल के साथ ही अपनी पार्टी के कुछ लोगों से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

पहले से ही दो फाड़ हो चुके ‘जयस’ के नेता डॉ. अलावा ने पहले दावा किया था कि वे निमाड़ सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में पचास-साठ उम्मीदवार खड़े करेंगे। तब ऐसा माना गया था कि ‘जयस’ का आदिवासी क्षेत्रों में एक तीसरी शक्ति के रूप में उदय हो रहा है जो भाजपा और कांग्रेस दोनों को प्रभावित करने वाला है।

पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अकेले डॉ. अलावा को कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने अपने चुनाव चिन्ह पंजे पर लड़ने के लिए तोड़ लिया। ‘जयस’ नेता मान भी गए और बाकी सीटों की मांग छोड़ दी। पर अलावा ने कांग्रेस से मांग जरूर की थी कि वे कुक्षी से ही लड़ना चाहते हैं क्योंकि वह स्थान उनके संगठन की गतिविधियों का केंद्र है। मनावर में स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। दिग्विजय सिंह कुक्षी के मौजूदा विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल को छेड़ना नहीं चाहते थे।

उन्होंने अलावा को मनावर से कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़ने के लिए तैयार कर लिया। उनका साथ दिया तीन बार के कांग्रेसी सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी ने, जो 2008 में रंजना बघेल से हार चुके थे। इधर कुक्षी में पिछली बार केवल 1639 मतों से हारे निरंजन डावर पांच साल से क्षेत्र में काम में लगे हुए थे। डावर कहते हैं कि जब उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल हो रही थी, तब उनका ही नाम सबसे ऊपर था। वे तैयारी में भी जुटे थे और लाखों रुपए खर्च भी कर चुके थे। सारे कांग्रेसी कार्यकर्ता भी उनके नाम को लेकर उत्साहित थे।

इस बार तो रंजना बघेल को हराने में भाजपा के लोग भी उनका साथ देने वाले थे पर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और दीपक बावरिया ने चुपचाप तरीके से अलावा को ‘पंजा’ थमा दिया। अब अलावा के साथ प्रचार में राजूखेड़ी के अलावा कांग्रेस का कोई बड़ा स्थानीय नेता काम नहीं कर रहा है। दिग्विजय जब मनावर आए थे, तब उनका इस बात को लेकर काफी विरोध किया गया, काले झंडे भी दिखाए गए। निरंजन डावर ने भी निर्दलीय के तौर पर बाद में अपना नामांकन भर दिया, जिसे उन्होंने भारी दबाव के चलते बुधवार को वापस ले लिया।

मनावर में इस समय भाजपा के साथ-साथ कांग्रेसी भी डॉ. अलावा को हराने में जुटे हैं। उनका कहना है कि ‘जयस’ अगर जीत गई तो मनावर की सीट हमेशा के लिए कांग्रेस से छिन जाएगी। कांग्रेस नेता मानते हैं कि अलावा जीत गए तो क्षेत्र में नक्सलवाद हावी हो जाएगा। मेधा पाटकर और हार्दिक पटेल जैसे नेताओं का गढ़ बन जाएगा।

लोगों को डराना-धमकाना शुरू हो जाएगा। पाटकर और पटेल दोनों ही अलावा का समर्थन भी कर रहे हैं। डावर ने चाहे नाम वापस ले लिया हो, राजूखेड़ी और अलावा के खिलाफ आक्रोश के चलते अधिकांश कांग्रेसी कार्यकर्ता अब घर बैठ जाएंगे या क्षेत्र छोड़ देंगे।

अलावा कहते हैं कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। वे आदिवासियों के हितों के लिए काम कर रहे हैं पर निहित स्वार्थ वाले लोग उन्हें रोकना चाहते हैं। वे ऐसा होने नहीं देंगे। क्षेत्र के सारे आदिवासी और गरीब तबके के लोग उनके साथ हैं। यहां स्थित सीमेंट प्लांट ने भाजपा के नेताओं की मदद से बत्तीस गांवों की जमीन को खरीद लिया है और आदिवासी रहवासियों को अपनी जगहों से हटाया जा रहा है।

मनावर के साथ लगे गांवों में घूमने से पता चलता है कि हालात कितने खराब हैं। खदानों से चूना पत्थर कन्वेयर बेल्ट के जरिए गांवों के ऊपर के आसमान को चीरते हुए प्लांट तक पहुंचता है। अलावा कहते हैं कि इलाके में केवल गांव की जमीन ही नहीं सबकुछ खरीद लिया गया है, जिसमें उनका विरोध कर रहे निहित स्वार्थों का ईमान भी शामिल है।

डॉ. अलावा को जिताने में हाल-फिलहाल उनके संगठन के युवा कार्यकर्ता और राजूखेड़ी के साथ जुड़े कुछ कांग्रेसी ही जुटे हैं। कांग्रेस का कोई बड़ा नेता दिल्ली या भोपाल से स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते अलावा के पक्ष में मनावर पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

डॉ. अलावा को हराने में चारों तरफ की ताकतें लगी हुई हैं। अलावा को पता है कि उनकी जीत ‘जयस’ को जिंदा रखने के लिए कितनी जरूरी है और हार के परिणाम क्या होंगे। मनावर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव तय करने वाला है कि आदिवासी क्षेत्रों में डॉ. अलावा और ‘जयस’ को इलाके में राजनीतिक रूप से जिंदा रहने दिया जाए या बेदखल कर दिया जाए। मनावर में मुकाबला कांग्रेस भाजपा और ‘जयस’ तीनों के लिए दिलचस्प होने वाला है।

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