Thursday, April 25, 2019

क्या सेक्स वर्क एक आम पेशा हो सकता है?

एम्सटर्डम का रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट घुमावदार गलियों और घरों की खिड़कियों पर खड़ी होकर ग्राहकों को लुभाती महिलाओं के लिए मशहूर है.

यह नीदरलैंड में पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है, जहां पिछले कई दशकों से सुरक्षित और क़ानूनी रूप से वैध सेक्स की इजाज़त है. लेकिन जल्द ही ये सब बंद हो सकता है.

नीदरलैंड की संसद में सेक्स वर्क की क़ानूनी वैधता पर बहस की तैयारी चल रही है.

दक्षिणपंथी ईसाई और वामपंथी महिलावादी, दोनों सेक्स वर्क का विरोध कर रहे हैं.

उधर, रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट की यौनकर्मियों पर काम करने के अपने अधिकार को बचाने का दबाव है.

क्या यह बहस पेड सेक्स क़ानून में बदलाव ला सकती है? इससे इस पेशे से जुड़े लोगों के रोज़गार और उनकी ज़िंदगी पर कैसा असर पड़ेगा?

'मैं अनमोल हूं'
'क्या होता अगर वो आपकी बहन होती?' ये लाइन नीदरलैंड में सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान का हिस्सा है.

इस अभियान का नाम है- 'मैं अनमोल हूं' और इसके तहत पेड सेक्स को अपराध बनाने की मांग हो रही है.

सारा लूस इस अभियान के साथ काम करती हैं. उनका कहना है कि पिछले सात साल में 46 हज़ार लोगों के दस्तख़त जुटाए गए, तब जाकर संसद में बहस होने वाली है.

इस अभियान का मक़सद मौजूदा क़ानून को बदलना है ताकि 'नॉर्डिक मॉडल' को अपनाया जा सके.

कामकाजी महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा कम करने के लिए 'नॉर्डिक मॉडल' के तहत सेक्स वर्कर को किराये पर लेने वाले मर्दों पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

फ़िलहाल नीदरलैंड में दो वयस्कों के बीच रज़ामंदी से पेड सेक्स वैध है. यह क़ानून 1971 से लागू है.

लूस को लगता है कि #MeToo के ज़माने में यह क़ानून पुराना पड़ चुका है. रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट में चाहे कितनी भी यौन आज़ादी हो, यह आज के ज़माने के हिसाब से नहीं है.

रोमानिया की एक सेक्स वर्कर (जो चेरी के छद्मनाम से जानी जाती हैं) का कहना है कि वह किराया चुकाने और कुछ पैसे कमाने के लिए यह काम करती हैं.

वो एक दशक तक रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट में काम कर रही हैं.

उन्होंने बीबीसी की एना हॉलिगन से कहा, "यदि यह याचिका (संसद में) मंज़ूर कर ली जाती है तो यह मुझे यहां से बाहर निकालने के लिए अच्छा क़दम होगा."

फ़ॉक्सी नाम से जानी जाने वाली दूसरी सेक्स वर्कर को लगता है कि इससे उनका पेशा और वर्जित हो जाएगा. उनकी निगरानी बढ़ जाएगी और लोग उनको कम स्वीकार करेंगे.

वो कहती हैं, "हमें भूमिगत होना पड़ेगा ताकि पुलिस और हेल्थ सर्विस के लोग हमें आसानी से न पकड़ पाएं."

फ़ॉक्सी का कहना है कि वो अपनी मर्ज़ी से यह काम करती है और मानव तस्करी जैसी समस्याएं दूसरे क्षेत्रों में भी हैं.

तो क्या महिलाओं को अपने तरीके़ से पैसे कमाने की आज़ादी देने के लिए वैध सेक्स वर्क जारी रहेगी या यह वास्तव में दमनकारी है?

वेश्यावृत्ति रोकने वाले क़ानून महिलाओं की कितनी हिफ़ाज़त करते हैं और स्वास्थ्य सेवा जैसे लाभों तक उनकी कितनी पहुंच बनाते हैं, यह सभी देशों में एक समान नहीं है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ग़रीब देशों में वेश्यावृत्ति निरोधी क़ानून का सहारा लेकर अक्सर महिला सेक्स वर्करों को ही प्रताड़ित किया जाता है.

इसके अलावा, ये क़ानून बीमारियां फैलने से रोकने, मानव तस्करी या महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा को रोकने में हमेशा कारगर नहीं रहे हैं.

किंग्स कॉलेज लंदन में क़ानून और सामाजिक न्याय की प्रोफेसर प्रभा कोटिश्वरन कहती हैं, "वेश्यावृत्ति निरोधी क़ानून से सेक्स वर्कर्स के अधिकारों का हनन किया जाता है."

वो कहती हैं, "क़ानून से बचने के लिए उनको पुलिसवालों को रिश्वत देनी पड़ती है- या तो यौन रिश्वत या आर्थिक रिश्वत. मतलब यह कि रिश्वत में दिए गए पैसे की भरपाई के लिए उनको ज़्यादा सेक्स वर्क करना पड़ेगा."

अभियान चलाने वाले लोग, जो ख़ुद को उन्मूलनवादी कहते हैं, पुरुष ग्राहकों पर जुर्माना लगाने की मांग करते हैं. लेकिन दूसरे लोगों का मानना है कि सबसे ज़्यादा ध्यान महिलाओं को सशक्त बनाने पर होना चाहिए.

ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा क्या है? उन्मूलनवादियों का कहना है कि वेश्यावृत्ति को 100 फ़ीसदी वैध बना दिया जाए.

Thursday, April 11, 2019

पहले चरण के मतदान पर मोदी ने कहा- हवा का रुख किस तरफ है, ये आपके उत्साह से पता चल रहा

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को असम के सिलचर में रैली की। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में हवा का रुख किस तरफ है, ये आपके उत्साह से साफ दिख रहा है। पहले चरण के मतदान में ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ की जबरदस्त लहर दिख रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने बिहार के भागलपुर में जनसभा की। मोदी ने कहा कि 70 साल तक आपने लाल बत्ती के रौब को बढ़ते देखा, लेकिन गरीब के घर बत्ती जले, इसकी चिंता नहीं की गई। इस चौकीदार ने गरीबों के घर सफेद बत्ती जलाई।

'गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाईं'

मोदी की इस सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने कहा, "नेताओं को अपने आंगन तक चकाचक सड़क पहुंचाते तो आपने बहुत देखा, बिहार के गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाने का बीड़ा इस चौकीदार और उसके साथियों ने उठाया है। बड़े-बड़े फार्म हाउस वाले, महल जैसे बंगले बनाने वाले, नामी-बेनामी संपत्ति खड़े करने वाले भी आपने बहुत देखे। उनसे अलग आपके इस चौकीदार ने आपके चूल्हे-चौके का ध्यान रखा है। 70 साल तक आपने लाल बत्ती के रौब को बढ़ते देखा लेकिन गरीब के घर बत्ती जले, इसकी चिंता नहीं की गई। आपके इस चौकीदार ने लाल बत्ती हटाई और गरीबों के घर सफेद बत्ती जलाई है।"

'पाक के हुक्मरानों के चेहरे पर अब डर दिखता है'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "शांति की बात वही कर सकता है जिसकी भुजाओं में दम होता है। 2014 से पहले पाकिस्तान का रवैया क्या था। आतंकवादी भी पाक भेजता था और धमकियां भी पाक ही देता था। कांग्रेस की सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही उलझ कर रह जाती थी। आज पाक की स्थिति देखिए। वहां के हुक्मरान हों या आतंक के आका, डर उनके चेहरे पर दिख रहा है। आज वे दुनिया में जाकर अपने डर का रोना रो रहे हैं। लेकिन दुनिया में आज कोई पाकिस्तान को घास डालने वाला नहीं बचा।"

पीएम बनने के बाद दूसरी बार भागलपुर आए मोदी

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी दूसरी बार भागलपुर आए। इससे पहले वे 2015 में भागलपुर आए थे। तब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पीएम इन वेटिंग रहते 2014 में उन्होंने सैंडिस कंपाउंड में सभा को संबोधित किया था।

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।

पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।

2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।

यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।

Wednesday, April 3, 2019

राजनीति में 50% आरक्षण मिले तब महिलाओं की समस्याओं का हल होगा: हरमनप्रीत

हरबिंदर सिंह भूपाल, मोगा. आधा हिन्दुस्तान की सीरीज में आज मिलिए हरमनप्रीत कौर से। भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान। हरमन को क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से 2017 में अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। हरमन देश की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में शतक लगाया है। चुनाव के मद्देनजर भास्कर ने जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा- महिलाओं की समस्या का एक ही हल है। उन्हें राजनीति में 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।

महिलाओं के मन की बात क्या है?
महिलाओं के मन में भी देश की खुशहाली ही बसती है। लेकिन इसके बीच महिलाओं के हकों की सुरक्षा भी जरूरी हैं। जो इस तरह की सोच रखे, उन्हीं नेताओं को ही वोट मिलने चाहिए।

एक ओर सबरीमाला विवाद है... दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े बड़े फैसले हैं। क्या ये महिला वोटर्स को आकर्षित करते हैं?

फर्क इससे पड़ता है कि ऐसे कितने फैसले लागू हो पाते हैं।

इस चुनाव में पार्टी देखेंगी या प्रधानमंत्री पद का चेहरा?
न दल, न चेहरा। दोनों ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। मैं तो सिर्फ इतना देखूंगी कि देश को एक साथ जोड़कर आगे कौन ले जा सकता है।

आपके लिए सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?
आतंकवाद का सफाया सबसे जरूरी मुद्दा है। पिछले पांच सालों में आतंकवाद बढ़ा ही है।

चुनाव में महिलाओं का वोट प्रतिशत तो बढ़ता है, इसके बावजूद चुनाव लड़ने वाली महिलाएं कम क्यों हैं?
पुरुष प्रधान समाज इसकी बड़ी वजह है। राजनीति अलग विषय नहीं है।

तो महिलाओं की समस्याओं का राजनीति में क्या हल है?
मेरा मानना है महिलाओं को राजनीति में 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। वे पुरुषों के बराबर हैं तो राजनीति में यह दिखना भी चाहिए।

सरकार ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है, महिलाओं के लिए ऐसा नहीं होना चाहिए?
यह बराबरी की ओर ले जाने वाला बड़ा कदम हो सकता है। न दल, न चेहरा...जो देश को आगे ले जाए उसे वोट

वह कौनसा क्षेत्र है, जहां नई सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए?
मेरे विचार से तो खेल ऐसा क्षेत्र है, जहां तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। महिलाओं को आगे बढ़ने के मौके देने के लिहाज से यह जरूरी भी है।